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The Science of getting Rich|| D.WATTLES WALLANCE AND WALLANCE D. WATTLES

इंट्रोडक्शन (Introduction) क्या आप अमीर होने का ख्वाब देखते है? क्या आप एक अच्छी लाइफ जीना चाहते हो? क्या आप लाइफ में बेस्ट बनना चाहते हो? तो इस बुक में आप सक्सेस, हैप्पीनेस और अमीर बनने का सीक्रेट पढेंगे. आप चाहे जिस बैकग्राउंड से बिलोंग करते हो, फिर भी आप अमीर हो सकते हो. आपके सपने सच हो सकते है. क्योंकि ये बुक आपको अमीर बनने का एक्जेक्ट तरीका बताएगी. बस आपको वो टेक्नीक्स और गाइडलाइन्स फोलो करनी होगी जो इस बुक में दी गयी है. जो लाइफ आप जीना चाहते हो, आपसे ज्यादा दूर नहीं है. पर इसके लिए आपको एक सर्टेन वे में सोचना होगा. जो आपके पास है, आपको दूसरो के प्रति थैंकफुल होना चाहिए. आपकी कोशिश यही हो कि आप दूसरो के काम आ सके. आप इस बुक में पढ़ी हुई बातो को अपनी लाइफ में अप्लाई करोगे तो आपको कोई भी अमीर होने से नहीं रोक पायेगा.    द राईट टू बी रिच (The Right to be Rich) क्या अमीर होने की चाहत रखना गलत है? ऐसा कौन है जो एक आराम की लाइफ नहीं चाहता? क्या ये सपना देखना गलत है? नहीं, बिलकुल नहीं. अमीरी का मतलब सिर्फ पैसे से नहीं है. बल्कि इसका मतलब है कि आपके पास ऐसे टूल्स होने चाहि...

Rich Dad's Before You Quit Your Job\Robert kiyosaki

इंट्रोडक्शन(Introduction)
क्या आप अपने रेगुलर 9 टू 5 जॉब से थक चुके हैं? क्या आप एक एम्प्लोई के रूप में काम करते करते बोर हो गए हैं? अगर हाँ, तो ये बुक आपके लिए है.
शायद आप भी ऐसे लोगों को जानते होंगे जिन्होंने जॉब छोड़कर बिज़नेस की शुरुआत की  और आज वो काफ़ी सक्सेसफुल हैं और अच्छा ख़ासा कमा रहे हैं. आप भी उनमें से एक बन सकते हैं.
ये बातें सिर्फ़ कोरी कल्पना नहीं है और ना ही कोई सपना है. इस बुक के ऑथर रॉबर्ट आपको सिखाएँगे कि अपनी जॉब छोड़ कर एक लंबी छलांग लगाने से पहले आपको क्या क्या सीखने की ज़रुरत है.
एक बिजनेसमैन बनना आसान नहीं है. इस बुक के ज़रिए आपको ये समझ में आएगा कि इस प्रोफेशन में सिक्योरिटी नाम की कोई चीज़ नहीं होती. इसमें आपको रेगुलर सैलरी और बेनिफिट नहीं मिलने वाले. आप ये भी जानेंगे कि नए बिजनेसमैन बार-बार और कई बार फेल भी होते हैं. लेकिन मायने ये रखता है कि आप अपनी गलतियों से सीख कर कड़ी मेहनत करने के लिए तैयार हों.
इस सफ़र की शुरुआत अपना माइंडसेट और नज़रिया बदलने से होती है. हो सकता है कि आप सालों से एक एम्प्लोई हों और एक एम्प्लोई की तरह ही सोचते हों लेकिन अब इसे बदलने का समय आ गया है.एक बिज़नेसमैन किस तरह सोचता है ये सीखने के बाद आपको फ्रीडम और सक्सेस दोनों मिलेंगे.एक सक्सेसफुल बिजनेसमैन बनने के लिए यहाँ कुछ ख़ास लेसन बताए गए हैं. आइए एक-एक करके उन्हें समझते हैं.

Lesson #1
What is the difference between an entrepreneur and an employee?

“रिच डैड पुअर डैड” एक बहुत ही मशहूर बुक है. उसमें जो पुअर डैड थे उनका कहना था कि “मन लगाकर पढ़ाई करो, अच्छे मार्क्स लाओ ताकि आपको एक स्टेबल इनकम वाली अच्छी जॉब मिल सके”. उन्होंने रॉबर्ट को भी एम्प्लोई बनने के लिए encourage किया.
तो वहीँ रिच डैड का कहना था कि “अपना ख़ुद का बिज़नेस शुरू करो और उन लोगों को काम पर रखो जो आपसे ज़्यादा स्मार्ट हैं”. उन्होंने रॉबर्ट को एक बिजनेसमैन बनने के लिए encourage किया.
तो एक बिजनेसमैन और एम्प्लोई में आखिर फ़र्क क्या होता है? एक एम्प्लोई बिज़नेस की शुरुआत होने के बाद उसमें काम करना शुरू करता है. लेकिन एक बिजनेसमैन को बिज़नेस के शुरू होने से पहले ही काम पर लगना पड़ता है.
सच्चाईतोये है कि 99% नए बिज़नेस अपनी 10th एनिवर्सरी के पहले ही बंद हो जाते हैं. ज़्यादातर बिज़नेस ख़राब planning की वजह से फेल होते हैं. कंपनी का ओनर अपनी कड़ी मेहनत से बिज़नेस को लंबे समय तक चलाने की कोशिश करता है. हालांकि, ऐसा करने के कई सालों के बाद ओनर भी थक जाता है. काफ़ी समय और पैसा उन एक्टिविटीज में लगानी पड़ती हैं जो असल में प्रॉफिट कमाने में कोई मदद नहीं करते. पहली बात, अगर किसी बिज़नेस को ख़राब तरीके से डिज़ाइन किया गया हो तो ओनर की घंटों की कड़ी मेहनत भी उसे बचा नहीं सकती.
रॉबर्ट के एक दोस्त थे जिनका नाम जॉन था. जॉन ने अपना बिज़नेस शुरू करने के लिए एक बड़े बैंक में जॉब छोड़ दी थी. वो लोन ऑफिसर के रूप में काम करते थे जिसके लिए उन्हें अच्छी सैलरी मिलती थी. लेकिन उन्होंने देखा कि बैंक के जो सबसे अमीर कस्टमर्स थे वो बिजनेसमैन थे.जॉन सोचा करते थे, क्या कभी वो उनमें से एक बन पाएँगे. वो एक एम्प्लोई की तरह नहीं बल्कि एक बॉस बनकर अपने तरीके से काम करना चाहते थे.
इसलिए जॉन ने जॉब छोड़ दी और अपनी माँ के साथ एक छोटा सा फ़ूड जॉइंट खोल लिया. वो वहाँ लंच सर्व करते थे. उन्होंने शहर में कॉर्पोरेट ऑफिस के पास एक जगह रेंट पर ली. हर रोज़, जॉन और उनकी माँ सुबह 4 बजे उठते और खाना तैयार करने में लग जाते. दोनों कम दाम पर अच्छा ख़ासा खाना परोसने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे थे.वो कम दाम लेते थे लेकिन प्लेट भर कर खाना देते थे.
रॉबर्ट अक्सर वहाँ खाने और उनसे बातें करने जाते थे.जॉन बहुत ख़ुश लग रहे थे. उन्हें कस्टमर्स को सर्व करना बहुत पसंद था. वो अक्सर रॉबर्ट से कहते, “किसी दिन हम भी एक बड़ा नाम होंगे. हम लोगों को काम पर रखेंगे ताकि वो हमारे लिए कड़ी मेहनत कर सकें”. लेकिन वो दिन कभी नहीं आया, जॉन की माँ गुज़र गईं थी. जॉन ने जॉइंट बंद करके एक रेस्टोरेंट में मैनेजर की पोस्ट के लिए अप्लाई किया. अब जॉन एक बार फ़िर से एम्प्लोई बन गए थे.
आखरी बार जब रॉबर्ट उनसे मिले तो जॉन ने बताया कि उनकी सैलरी कम थी लेकिन उन्हें कम घंटे काम करना पड़ता था. अब आप कहेंगे कि कम से कम जॉन ने बिज़नेस चलाने की कोशिश तो की और उसने बहुत कड़ी मेहनत भी की. अगर उनकी माँ जिंदा होतीं तो हो सकता था कि उनका बिज़नेस बढ़ जाता और वो बहुत पैसा कमा लेते.
रॉबर्ट को जॉन की माँ से बहुत लगाव था. वो इस बात से दुखी थे कि इतनी मेहनत करने के बावजूद उनका बिज़नेस फेल हो गया था. लेकिन ये फेलियर भी बिजनेसमैन होने का एक हिस्सा है.जॉन के बिज़नेस को डिज़ाइन करने के तरीके में कुछ गलती थी.
एक सक्सेसफुल बिज़नेस को इस तरह डिज़ाइन किया जाना चाहिए ताकि वो अपने ओनर के ना होने के बावजूद भी चलता रहे और ग्रो करता रहे. यही एक बिजनेसमैन का असली काम होता है. उसे एक ऐसा बिज़नेस मॉडल बनाने की ज़रुरत है जो उसके होने या ना होने के बावजूद कस्टमर्स को वैल्यू दे सके, लोगों को काम पर रख सके, ग्रो कर सके.
रॉबर्ट के अनुसार, बिज़नेस में चार तरह के लोग होते हैं.पहला है एम्प्लोई. दूसरे हैं, ख़ुद का बिज़नेस चलाने वाले छोटे बिज़नेस ओनर्स. तीसरे हैं, बड़े बिज़नेस ओनर्स जो 500 या उससे ज़्यादा एम्प्लाइज को काम पर रखते हैं और चौथे हैं इनवेस्टर्स.
एक सीनियर मैनेजर और सिक्योरिटी गार्ड दोनों ही कंपनी के एम्प्लोई हैं. उन्हें रेगुलर सैलरी मिलती है. ऐसे लोगों को सेफ़ और फिक्स्ड इनकम चाहिए.
बिज़नेस ओनर्स का ये मानना है कि अगर आप कोई काम ठीक से करवाना चाहते हैं तो आपको उसे ख़ुद करना चाहिए.ऐसे लोगों को दूसरों पर कम विश्वास होता है इसलिए इनका बिज़नेस ज़्यादा बड़ा नहीं हो पाता.ये छोटे बिज़नेस ओनर्स सारे काम ख़ुद सँभालते हैं.
वहीँ दूसरी ओर, बड़े बिज़नेस ओनर्स अच्छा सिस्टम बनाने में और टैलेंटेड लोगों को काम पर रखने में विश्वास करते हैं.ऐसा करने से,कंपनी ओनर की लगातार निगरानी के बिना भी बड़ी हो सकती है.
इनवेस्टर्स वो होते हैं जो छोटे और बड़े बिज़नेस की तलाश में रहते हैं जो उनके पैसों का सही इस्तेमाल कर उसे और बढ़ा सके.
Lesson # 2
Learn How to Turn Bad Luck Into Good Luck
ये चैप्टर अपनी गलतियों से सीखने के बारे में है.आपको फेलियर को या अपनी गलतियों को bad लक के रूप में नहीं देखना चाहिए. आपको उन्हें अपने बिज़नेस को और ख़ुद को ज़्यादा जानने के मौकों के रूप में देखना चाहिए. 
गलतियाँ स्टॉप सिगनल की तरह होती हैं. ये warning साइन के जैसे हैं जिसका मतलब है कि आपको रुक कर सोचने की ज़रुरत है यानी आप कहीं ना कहीं भूल कर रहे हैं और आपको उस भूल का पता लगाने की ज़रुरत है.ये हमें कुछ नया सीखने का मौका देती है.
इसलिए अगर अगली बार आप फेल होते हैं तो निराश मत होइए, आपको बस रुक कर सोचने की ज़रुरत है. आपको गुस्सा और दोष देने की फीलिंग्स को साइड में रखना होगा. अपना नज़रिया बदलें और इस बात को एक्सेप्ट करें कि फेल होना बुरा नहीं है. इससे आपको हताश होकर चीज़ों को बीच में छोड़ना नहीं है बल्कि ये समझना है कि आप क्या गलती कर रहे थे और उससे सीखना है.आइए रॉबर्ट के पुअर डैड की कहानी सुनते हैं.
50 की उम्र में वो गवर्नमेंट जॉब से रिटायर हुए और उन्होंने ख़ुद का बिज़नेस शुरू किया. उन्होंने एक फेमस आइसक्रीम ब्रैंड की फ्रैंचाइज़ी ली. पुअर डैड ने सोचा कि ये बिज़नेस तो फेल हो ही नहीं सकता क्योंकि लोग उस ब्रैंड के दीवाने थे. लेकिन सिर्फ़ दो सालों में ही उनकी दूकान बंद हो गई और उनका सारा पैसा डूब गया.
इस घटना की वजह से उन्हें बहुत गुस्सा आ रहा था और वो काफ़ी उदास भी हो गए थे. अपने बिज़नेस के फेल होने के लिए उन्होंने फ्रेंचाइज़र को दोषी ठहराया. उन्होंने अपनी गलतियों से कुछ नहीं सीखा.उनके स्टोर में कुछ गिने चुने लोग ही आया करते थे लेकिन इसके अलावा उनके लॉयल कस्टमर्स नहीं बन पाए. वो स्टोर में घंटों अकेले बैठे रहते.
यहाँ सबक ये है कि किसी और को दोष देने की बजाय उन्हें तुरंत इस बात को एक्सेप्ट कर लेना चाहिए था कि कहीं ना कहीं उनसे गलती हुई है. उन्हें अंधाधुन आगे बढ़ने की जगह रुक कर थोड़ा सोचना चाहिए था.उन्हें अपनी गलतियों का पता लगाकर उसे सुधारना चाहिए था.लेकिन उन्होंने इस पर गौर ही नहीं किया और एक के बाद एक दिन निकलते गए जिसका अंजाम ये हुआ कि उनका दिवाला निकल गया था.
पुअर डैड ने बिज़नेस के दौरान अपने स्टाफ़ को काम से निकाल दियाथाताकि वो कॉस्ट को कम कर सके और सारा काम ख़ुद करने लगे. इसके बाद उनका अपने बिज़नेस पार्टनर्स से झगड़ा हुआ. उन्होंने एक लॉयर की मदद से फ्रेंचाइज़र पर केस कर दिया.
पुअर डैड ने अपना सारा पैसा अपनी गलतियों का दोष दूसरों पर लगाने में ख़र्च कर दिया. फेलियर एक्सेप्ट कर एक नई शुरुआत करने के बजाय वो हालात बद से बदतर करते चले गए.
एक बिज़नेस खड़ा करने के प्रोसेस में, फेलियर वो सच है  जिसे टाला नहीं जा सकता. इसलिए जितनी जल्दी आप अपनी गलतियों से सीखेंगे उतना ही आपके लिए अच्छा होगा. यहाँ एक कॉमन प्रोसेस बताया गया है जिससे हर एक बिज़नेसमैन को गुज़रना पड़ता है.
पहला, अपने बिज़नेस की शुरुआत करें. दूसरा, फेल होने पर अपनी गलतियों से सीखें. तीसरा, एक गाइड या गुरु की तलाश करें. चौथा, अगर फ़िर फेल हुए तो हताश होने की जगह फ़िर उससे सीखें. पांचवा, अपने बिज़नेस के बारे में और जानने की कोशिश करें या ट्रेनिंग लें. छठा, अगर फेल हुए तो फ़िर उससे सीखें. सांतवा, अगर आपने सक्सेस हासिल कर ली तो आप थोड़ा रिलैक्स कर सकते हैं. आठवाँ, आप अपनी सक्सेस का जश्न मना सकते हैं. नौवां, अपने बिज़नेस से होने वाली इनकम पर ध्यान दें और अपनी हार और जीत का हिसाब रखें. दसवां, फ़िर से शुरू कर पहले स्टेप पर जाएं.
लेकिन सच्चाई तो ये है कि बिजनेसमैन बनने की इच्छा रखने वाले 90% लोग पहले स्टेप तक भी नहीं पहुँच पाते.उनके माइंड में एक परफेक्ट बिज़नेस प्लान तो होता है लेकिन उसे हकीकत में बदलने के लिए वो कोई एक्शन ही नहीं लेते. इसे Analysis Paralysis कहा जाता है.
यहाँ ये सबक सीखने को मिलता है कि जब तक आप कोशिश नहीं करेंगे तब तक आप जान ही नहीं पाएँगे. जब आप बिज़नेस शुरू ही नहीं करेंगे आपको कैसे पता चलेगा कि किस चीज़ की कमी है या किस चीज़ को बेहतर बनाने की ज़रुरत है? जब तक आपके पास सीखने के लिए कोई बिज़नेस नहीं होगा, आप बिजनेसमैन नहीं बन सकते.
फेल होना बुरा नहीं है लेकिन अपनी गलती ना मानना या उससे कुछ ना सीखना बहुत बुरा है.हम इंसान हैंऔर कभी-कभी गड़बड़ हो जाती है. मायने ये रखता है कि आप गलती को पहचान कर उससे सीखें और दोबारा खड़े होने का ज़ज्बा दिखाएं. अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो आप हमेशा के लिए एक एम्प्लोई बन कर रह जाएँगे. फ़िर आप कभी नहीं जान पाएँगे कि अपना बिज़नेस चलाना कैसा लगता है.
 
Lesson #3
Know the Difference Between Your Job and Your Work
एक दिन, रिच डैड ने रॉबर्ट से काम (वर्क) और जॉब के बीच के फ़र्क के बारे में पूछा. सवाल सुनकर रॉबर्ट कंफ्यूज हो गए और उन्होंने कहा, “क्या आप एक ही चीज़ का ज़िक्र नहीं कर रहे हैं? जॉब का मतलब ही काम होता है, है ना?” 
रिच डैड मुस्कुराने लगे और कहा नहीं, दोनों में फ़र्क है. जॉब वो है जिसके लिए आपको पैसे दिए जाते हैं. लेकिन आपको काम के बदले हमेशा पैसे नहीं मिलते. एग्ज़ामपल के लिए,पढ़ाई करना, ट्रेनिंग या रिसर्च करना ये सब काम हैं. ये वो काम है जो आप जॉब की तैयारी के लिए करते हैं.
रिच डैड का मानना है कि आप जितना ज़्यादा काम करेंगे आपको जॉब में उतनी ज़्यादा सैलरी मिलेगी. जो लोग पढ़ते नहीं, ट्रेनिंग नहीं लेते या रिसर्च नहीं करते उन्हें जॉब में कम पैसे मिलते हैं.ये बात हर जगह लागू होती है फ़िर चाहे आप बिजनेसमैन हों या एक एम्प्लोई.
Lawyers और डॉक्टर्स को कई साल ट्रेनिंग लेनी पड़ती है. उन्हें कई घंटों तक काम करना पड़ता है जिसके लिए उन्हें पैसे नहीं दिए जाते. लेकिन ट्रेनिंग ख़त्म करने के बाद जब वो प्रोफेशनल बन जाते हैं तब वो पैसा कमाना शुरू करते हैं. और क्योंकि उन्होंने दस या उससे ज़्यादा सालों तक काम किया है, वो अपने फील्ड में एक्सपर्ट हो जाते हैं जिसके लिए उन्हें अच्छी ख़ासी फ़ीस मिलना शुरू हो जाती है.
यही बात एक बिजनेसमैन पर भी लागू होती है. अगर एक बिजनेसमैन ने तैयारी नहीं की या अपना होमवर्क नहीं किया तो उसका छोटा सा बिज़नेस फेल होना तय है. एक एम्प्लोई हर काम के बदले में पैसा चाहता है, ये उसका माइंडसेट होता है. जब तक आप इस तरह की सोच रखेंगे, आप कभी भी एक बिजनेसमैन नहीं बन सकते.
एम्प्लोई उम्मीद करते हैं कि उनकी कंपनी उन्हें फ्री में ट्रेनिंग दे. वो उम्मीद करते हैं कि उनके बॉस उन्हें अपनी स्किल को बेहतर करने का मौक़ा देंगे लेकिन ये सोच बिलकुल गलत है. एम्प्लाइज अपना ख़ाली समय अक्सर फिल्में देखने में, गपशप करने में बिता देते हैं. वो अपने फ्री टाइम को कुछ सीखने के लिए यूज़ नहीं करते.कोई भी आपको एक्स्ट्रा काम के लिए पैसे नहीं देगा लेकिन इसका फ़ायदा आपको बाद में होगा. अगर आप ख़ुद की नॉलेज को बढ़ाएंगे तो आपके पास पैसा कमाने के ज़्यादा मौके होंगे.
अब प्रोफेशनल athletes को ही ले लीजिए. उन्होंने कई सालों तक फ्री में काम किया. उन्होंने कम उम्र से ही ट्रेनिंग लेना शुरू किया. ना जाने वो कितनी बार गिरे, उन्हें कितनी चोट आई लेकिन वो डट कर प्रैक्टिस करते रहे. क्योंकि इन लोगों ने हर डिटेल पर ध्यान दिया, अपने स्किल को इम्प्रूव किया उन्हें नेशनल टीम में जगह मिली और उन्होंने इंटरनेशनल गेम्स जीत कर देश का नाम रौशन किया.

क्या आपको लगता है कि जब फेमस रॉकबैंड Beatles ने शुरुआत की थी तो उन्हें बहुत पैसे मिलते थे? नहीं, बिलकुल नहीं. कई सालों तक कोई नहीं जानता था कि Beatles कौन थे. वे लिवरपूल के सिर्फ़ एक नौसिखिया रॉक बैंड थे. Beatles ने फेमस होने के पहले कई क्लब्स में पूरी-पूरी रात परफॉर्म किया है.उनकी रोज़ की जो टफ ट्रेनिंग थी उसने उन्हें एक महान और उम्दा आर्टिस्ट बनाया.Beatles ने अपना होमवर्क किया और उसी कारण वो इतने सक्सेसफुल हुए. अगर हम पुअर डैड की कहानी के बारे में सोचें तो उन्होंने कोई होमवर्क नहीं किया था इसलिए उनका बिज़नेस फेल हो गया.
रॉबर्ट ने B-I Triangle या Big Business-Investor Triangle के बारे में बताया है. अगर आप सक्सेस के शिखर तक पहुंचना चाहते हैं तो आपको पांच फैक्टर्स को ध्यान में रखना होगा. पहला है, प्रोडक्ट. दूसरा है, लीगल, तीसरा है, सिस्टम, चौथा है कम्युनिकेशन और पांचवा है कैश फ़्लो.
B-I Triangle को पांच लेवल में डिवाइड किया गया है.प्रोडक्ट सबसे टॉप पर है और कैश फ़्लो सबसे नीचे.इन पाँचों लेवेल्स को ठीक से मैनेज किया जाए तो बिज़नेस में तरक्की होना तय है.
पुअर डैड का प्रोडक्ट कमाल का था लेकिन वो कम्युनिकेशन और मार्केटिंग में चूक गए. उन्होंने सोचा कि आइसक्रीम का वो ब्रैंड इतना popular था कि वो कस्टमर्स को attract करने के लिए काफ़ी था और उनके बिज़नेस के सक्सेसफुल होने की guarantee थी.
असल में पुअर डैड ने एक सस्ती जगह के पुराने शॉपिंग मॉल में अपना स्टोर खोला था. इसके बजाय उन्हें ऐसी जगह रेंट पर लेनी चाहिए थी जहां काफ़ी लोगों का आना जाना लगा रहता है. वो आइसक्रीम का ब्रैंड popular था, पुअर डैड का स्टोर नहीं.
क्योंकि वो एक फ्रैंचाइज़ी था, पुअर डैड ने चार फैक्टर्स को पूरा कर लिया था जो था कैश फ़्लो, सिस्टम, लीगल और प्रोडक्ट. लेकिन पांचवा फैक्टर, कम्युनिकेशन सही नहीं था. पुअर डैड ने फ्रैंचाइज़ी खरीदने की जल्दबाज़ी की ताकि उन्हें बिज़नेस को नए सिरे से शुरू ना करना पड़े, वो एक बने बनाए बिज़नेस से प्रॉफिट कमाना चाहते थे. वो फ्री में काम करने के लिए तैयार नहीं थे और उसके कारण वो एक बिजनेसमैन के जॉब में फेल हो गए. उन्होंने अपना सारा पैसा खो दिया और दोबारा एक एम्प्लोई बन कर रह गए.
 
Lesson #4
Success Reveals Your Failures
बिजनेसमैन बनने से पहले रॉबर्ट Xerox Corporation में जॉब करते थे. उस समय वो कंपनी के सबसे ख़राब सेल्समैन थे. वो एक भी प्रोडक्ट बेच नहीं पाते थे और अपने साथियों से काफ़ी पीछे थे. इसलिए रॉबर्ट ने सलाह माँगने के लिए रिच डैड को बुलाया.
“तुम एक दिन में कितने कॉल्स करते हो?”, रिच डैड ने पूछा. रॉबर्ट ने कहा तीन या चार लेकिन ज़्यादातर वक़्त वो कॉफ़ी शॉप में या पेपरवर्क करने में बिताते थे. उन्हें ये कॉल्स करने में बड़ी शर्म आती थी. रॉबर्ट को रिजेक्शन से नफ़रत थी इसलिए वो कम से कम कॉल करना चाहते थे.
रिच डैड ने कहा कि पूरी दुनिया में ऐसा एक भी इंसान नहीं है जो रिजेक्ट होना पसंद करता है. बस कुछ गिने चुने लोग ही हैं जो अपने डर को दूर कर ऐसे कॉल्स करने में बेहतर हो जाते हैं.फेलियर को रोकने के लिए आपको जल्द से जल्द फेल होने की ज़रुरत है.जी हाँ, आपने बिलकुल ठीक सुना.जितनी जल्दी आप फेल होंगे, उतनी ही तेज़ी से आप अपनी गलतियों से सीखेंगे. अगर आप ऐसा नहीं कर सकते तो आप पीछे भी हट सकते हैं लेकिन इससे आप सिर्फ़ एक loser बन कर रह जाएँगे.
रिच डैड ने सलाह दी कि रॉबर्ट को नाईट शिफ्ट में एक अलग सेल्स जॉब ले लेनी चाहिए. उन्होंने ऐसा इसलिए कहा ताकि रॉबर्ट जल्द से जल्द फेल हो सकें. लेकिन रिच डैड की बात सुनकर रॉबर्ट शिकायत करने लगे. उन्होंने कहा कि वो रात में काम नहीं करना चाहते. इसके बजाय वो नाईट क्लब में पार्टी और एन्जॉय करना चाहते थे.रिच डैड ने पूछा, “ तुम सच में एक बिजनेसमैन बनना चाहते हो या नहीं?”
एक बिजनेसमैन की सबसे ज़रूरी स्किल होती है प्रोडक्ट बेचना. सेल्स के बिना कोई बिज़नेस टिक नहीं सकता. अगर आप एक प्रोडक्ट भी नहीं बेच सकते तब आपके लिए एक एम्प्लोई का रोल ही परफेक्ट है.
इसलिए रॉबर्ट ने फ़िर से कोशिश की. लेकिन लोगों ने फ़िर उन्हें रिजेक्ट कर दिया.वो हमेशा कहते, “सॉरी, हमें इसमें कोई इंटरेस्ट नहीं है” या“अगर तुम यहाँ से नहीं गए तो मैं फ़ौरन पुलिस को फ़ोन कर दूंगा”. 
तब जाकर उन्हें रिच डैड की बात समझ में आई कि जॉब में सैलरी मिलने से पहले आपको फ्री में काम करने की ज़रुरत होती है. इसलिए रॉबर्ट ने चैरिटी के काम के लिए अपना नाम आगे किया. इस काम में उन्हें लोगों को कॉल कर पूछना था कि क्या वो कुछ पैसे दान करना चाहते थे. रॉबर्ट Xerox में अपना जॉब ख़त्म कर शाम को 7-9 ये काम करने लगे.
और सच में वो बहुत तेज़ी से फेल हुए. अब दिन में तीन या चार कॉल की बजाय रॉबर्ट बीस कॉल कर रहे थे. उन्हें बार-बार रिजेक्ट किया गया और वो इस फेलियर को बेहतर ढ़ंग से हैंडल करना सीख रहे थे.
रॉबर्ट धीरे-धीरे लोगों से हाँ कहलवाने के लिए सही शब्दों का इस्तेमाल करने लगे. वो ज़्यादा अच्छे से बात करना सीख गए थे. इस तरह, अपने एक्स्ट्रा काम में वो जितनी तेज़ी से फेल हुए उतनी ही तेज़ी से Xerox में अपनी जॉब में कमाने लगे.अब वो सबसे बुरे सेल्समेन नहीं थे. हर बीतते दिन के साथ वो प्रोडक्ट बेचने में और भी बेहतर होते जा रहे थे.
Xerox में अपने चौथे साल में वो कंपनी के बेस्ट सेल्समेन बन गए. अब वो बड़ी आसानी से किसी को कुछ भी बेच सकते थे. तब उन्हें एहसास हुआ कि वो अब एक बिजनेसमैन बनने के लिए बिलकुल तैयार हो गए थे.
 
Lesson #5
The Process Is More Important than the Goal
अबरॉबर्ट ने अपने पहले बिज़नेस की शुरुआत की. उनका प्रोडक्ट था नायलॉन सर्फर वॉलेट. ये एक बहुत ही बेहतरीन प्रोडक्ट था. वो और उनके पार्टनर मार्केटिंग करने में उस्ताद थे. आश्चर्य की बात तो देखिए कि जो लड़का एक प्रोडक्ट नहीं बेच पाता था वो ख़ुद का बिज़नेस शुरू कर करोड़पति बन गया था.
वो यंग थे और अपनी सक्सेस देखकर उनका सिर  सातवे आसमान पर पहुँचगया था.अपने पैसों से उन्होंने रेसिंग कार खरीदी, पूरी रात पार्टी करते रहे. लेकिन कुछ समय बाद उनका बिज़नेस ख़राब होने लगा.अपने बिज़नेस में उन्होंने प्रोडक्ट और कम्युनिकेशन फैक्टर को ठीक से अप्लाई किया था लेकिन कैश फ़्लो, सिस्टम और लीगल में मात खा गए.जब बिज़नेस बढ़ने लगा तो रॉबर्ट और उनके पार्टनर इन तीनों फैक्टर को संभाल नहीं पाए. इस वजह से उन्हें काफ़ी नुक्सान उठाना पड़ा.
अब रॉबर्ट ने महसूस किया कि बिज़नेस को ख़राब तरीके से डिज़ाइन किया गया था.लेकिन कम से कम उन्होंने छे महीने के लिए करोड़पति होने का एक्सपीरियंस तो किया.यही तो रिच डैड कह रहे थे. ज़्यादातर लोगों को जिंदगी में ऐसा मौका नहीं मिलता. ज़्यादातर लोग एक जॉब और रेगुलर सैलरी से ही संतुष्ट हो जाते हैं. ऐसे लोगों का समय घर पर या ऑफिस में ही बीत जाता है.
रिच डैड ने सिर्फ़ पैसे, या बड़े बंगले और महँगी गाड़ियों के लिए बिज़नेस करने का फ़ैसला नहीं किया था.उन्होंने इसे एडवेंचर के लिए किया था. भले ही वो कई बार फेल हुए लेकिन रिच डैड को कभी उन एक्सपीरियंस के लिए पछतावा नहीं हुआ. जिस समय उन्होंने सक्सेस का स्वाद चखा वो उनके लाइफ का सबसे बेस्ट टाइम था.उन्होंने रॉबर्ट से कहा कि गोल से ज़्यादा वहाँ तक पहुँचने का प्रोसेस इम्पोर्टेन्ट होता है. फेलियर आपको याद दिलाते हैं कि आपसे कहीं ना कहीं कोई चूक हो रही है. आपको हमेशा सीखते रहने की ज़रुरत है ताकि आप सक्सेस की ओर बढ़ सकें.
रिच डैड ने समझाया कि रॉबर्ट ने लाखों तो कमा ही लिए थे जिसका मतलब था कि वो सही रास्ते पर थे. उन्हें बस इम्प्रूव करते रहने की ज़रुरत थी ताकि बिज़नेस बढ़ता रहे. कई सालों बाद,जबरॉबर्ट पीछे मुड़कर अपने कैरियर को देखते हैं तो सोचते हैकि कैसे वो सैलरी कमाने वाले से मल्टी-मिलियनेयर बन गए.
उन्होंने महसूस किया कि पिछले 30 सालों में उन्हें बिज़नेस के तीन प्रोसेस से होकर गुज़रना पड़ा.पहला था, लर्निंग प्रोसेस. दूसरा था, अर्निंग प्रोसेस और तीसरा था गिविंग बैक यानी वापस देने का प्रोसेस.
1974 से 1984 तक रॉबर्ट ने एक बिजनेसमैन बनने का तरीका सीखा. तब उनका बिज़नेस फेमस रॉक बैंड्स के लिए नायलॉन सर्फर वॉलेट और दूसरे प्रोडक्ट्स बनाना था. इन दस सालों में उन्होंने B-I triangle को अच्छे से मैनेज करना सीख लिया था. जैसा कि हमने पहले सीखा था ये बिज़नेस के पांच लेवेल्स के बारे में है जो है प्रोडक्ट, सिस्टम, लीगल, कम्युनिकेशन और कैश फ़्लो.
1984 से 1994 तक रॉबर्ट ने बहुत पैसा कमाना शुरू किया.उन्होंने अपनी गलतियों से सीखा और आखिरकार सक्सेस हासिल की.उन्होंने अपने प्रॉफिट को प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट किया जिससे उन्हें रेंट और दूसरे इनकम होने लगे.उन्होंने इन्वेस्टर्स और बिजनेसमैन बनने की इच्छा रखने वाले लोगों को बिज़नेस सीखाने का कोर्स भी ऑफर करना शुरू किया.
1994 से2004 तक रॉबर्ट ने फ़ैसला किया कि अब तक उन्होंने जितना भी कमाया है उसके बदले उन्हें भी कुछ करना चाहिए यानी गिविंग बैक. उन्होंने लाखों कमा लिए थे और अब वो ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को सिखाना चाहते थे कि वो भी बिज़नेस में कैसे सक्सेसफुल हो सकते हैं. इसके लिए उन्होंने Rich Dad Company बनाई.
रॉबर्ट ने ख़ुद से पूछा, “मैं ज़्यादा लोगों की मदद और सेवा कैसे कर सकता हूँ”. रॉबर्ट को सफलता के शिखर पर पहुँचने में तीस साल लगे. तो बताइए, हम में से कितने लोग इस प्रोसेस से गुज़रने के लिए तैयार हैं?
जब भी कोई ये सवाल पूछता है, “कौन कौन करोड़पति बनना चाहता है”? तो लोग बड़ी जल्दी अपना हाथ ऊँचा कर देते हैं. बेशक, हर कोई करोड़पति बनना चाहता है. लेकिन इससे भी ज़्यादा ज़रूरी सवाल तो ये है कि इस challenging प्रोसेस से गुज़रने के लिए कौन कौन तैयार है? वैसे तो कई तरीके हैं जिससे आप अमीर बन सकते हैं जैसे, जब आपको अच्छी ख़ासी जायदाद मिल जाती है या आप किसी अमीर इंसान से शादी कर सकते हैं, या किसी क्राइम के चक्कर में पद जाते हैं या लाटरी में पैसे जीतते हैं. लेकिन ये तरीके लंबे समय तक टिके नहीं रहते. ये आपको कभी सच्ची ख़ुशी और सक्सेस नहीं दे पाएँगे.
कई साल पहले, एक जर्नालिस्ट ने हेनरी फ़ोर्ड से पूछा, “अगर आप बिज़नेस में अपना सारा पैसा खो देते हैं तो आप क्या करेंगे?” हेनरी ने कहा, “मैं उसे पांच सालों के अंदर वापस कमा लूँगा”. 
इसलिए लाखों कमाने का सबसे अच्छा तरीका है एक स्मार्ट बिजनेसमैन बनना. अमीर होने से ज़्यादा ज़रूरी है स्मार्ट होना. अगर कभी आप अपना सारा पैसा खो भी देते हैं तो आप उस प्रोसेस से सीख कर ज़्यादा होशियार और स्मार्ट हो जाते हैं. जब तक आपका माइंडसेट एक स्मार्ट बिजनेसमैन जैसा होगा तब तक चाहे कुछ भी हो जाए आप हमेशा पैसा कमा कमाते रहेंगे बिलकुल हेनरी फ़ोर्ड की तरह.
 
कन्क्लूज़न (Conclusion)
तो आपने एक एम्प्लोई और एक बिजनेसमैन के बीच के फ़र्क के बारे में जाना.अगर आप सच में एक बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं तो आपको रिस्क लेने के लिए तैयार रहना होगा.बिजनेसमैन को मंथली सैलरी नहीं मिलती. कोई प्रॉफिट होने से पहले आपको ख़ुद रेंट, इंटरनेट सब का ख़र्च भी उठाना होगा.
आपने ये भी समझा कि बिज़नेस शुरू करने के प्रोसेस में हम कई बार फेल होते हैं. लेकिन जितनी जल्दी आप अपनी गलतियों को पहचान लेंगे उतनी ही जल्दी आप उसका हल भी ढूंढ सकते हैं. फेलियर इस प्रोसेस का हिस्सा है. जब तक आप कोशिश नहीं करेंगे तब तक आपको पता नहीं चलेगा. बिज़नेस के बारे में जानने का सबसे अच्छा तरीका है उसे रियल में एक्सपीरियंस करना.
आपने जॉब और वर्क के बीच के फ़र्क को भी समझा. एक बिज़नेस की शुरुआत में बिजनेसमैन बहुत सारे काम फ़्री में करते हैं. कभी-कभी उन्हें प्रॉफिट कमाने के लिए लंबे समय तक इंतज़ार करना पड़ता है. लेकिन याद रखें कि अगर आप डट कर काम करते रहे, सीखते रहे और ख़ुद को इम्प्रूव करते रहे तो आपको उसका बहुत अच्छा रिजल्ट मिलेगा.
आप जितनी बार फेल होंगे आपको सक्सेसफुल होने के लिए उतने ही ज़्यादा मौके मिलते रहेंगे. फेल होने से आपको पता चल जाएगा कि क्या काम करता है और क्या नहीं. इसी तरह आप एक स्मार्ट बिजनेसमैन बनते हैं.
आपने ये भी जाना कि गोल से ज़्यादा इम्पोर्टेन्ट उस तक पहुँचने का पूरा प्रोसेस होता है. आजकल लोगों को हर चीज़ इंस्टेंट चाहिए जैसे इंस्टेंट नूडल्स, इंस्टेंट प्यार और इंस्टेंट बहुत सारा पैसा. लेकिन रियल लाइफ में इंस्टेंट कुछ नहीं मिल सकता ख़ासकर सक्सेस तो बिलकुल नहीं. जो सक्सेस इंस्टेंट मिलती है वो उतनी जल्द ही ख़त्म भी हो जाती है. लंबी सक्सेस पाने के लिए कई challenges का सामना करना पड़ता है और खूब सारा काम करना पड़ता है.
एक बिजनेसमैन की जर्नी बहुत adventurous होती है. बिज़नेस करना कोई आसान काम नहीं है लेकिन अगर आपने अपना होमवर्क कर सब कुछ स्मार्टली हैंडल कर लिया तो आपको कमाल के रिजल्ट मिलते हैं. बिजनेसमैन का मतलब एक सेलेब्रिटी होना या बंगला और लक्ज़री कार खरीदना नहीं होता. बिजनेसमैन होने का मतलब है एक पर्पस होना और चीज़ों को अपने तरीके से करने की फ्रीडम होना. अगर आपके पास एक ख़ास पर्पस है जो आपकी इच्छाओं से भी बड़ा है तो आप एक्स्ट्राऑर्डिनरी सक्सेस हासिल करेंगे.

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