इंट्रोडक्शन (Introduction) क्या आप अमीर होने का ख्वाब देखते है? क्या आप एक अच्छी लाइफ जीना चाहते हो? क्या आप लाइफ में बेस्ट बनना चाहते हो? तो इस बुक में आप सक्सेस, हैप्पीनेस और अमीर बनने का सीक्रेट पढेंगे. आप चाहे जिस बैकग्राउंड से बिलोंग करते हो, फिर भी आप अमीर हो सकते हो. आपके सपने सच हो सकते है. क्योंकि ये बुक आपको अमीर बनने का एक्जेक्ट तरीका बताएगी. बस आपको वो टेक्नीक्स और गाइडलाइन्स फोलो करनी होगी जो इस बुक में दी गयी है. जो लाइफ आप जीना चाहते हो, आपसे ज्यादा दूर नहीं है. पर इसके लिए आपको एक सर्टेन वे में सोचना होगा. जो आपके पास है, आपको दूसरो के प्रति थैंकफुल होना चाहिए. आपकी कोशिश यही हो कि आप दूसरो के काम आ सके. आप इस बुक में पढ़ी हुई बातो को अपनी लाइफ में अप्लाई करोगे तो आपको कोई भी अमीर होने से नहीं रोक पायेगा. द राईट टू बी रिच (The Right to be Rich) क्या अमीर होने की चाहत रखना गलत है? ऐसा कौन है जो एक आराम की लाइफ नहीं चाहता? क्या ये सपना देखना गलत है? नहीं, बिलकुल नहीं. अमीरी का मतलब सिर्फ पैसे से नहीं है. बल्कि इसका मतलब है कि आपके पास ऐसे टूल्स होने चाहि...
इंट्रोडक्शन
क्या आपने लियोनार्डो डा विंची का नाम सुना है? कौन थे वो? वो एक जीनियस और महान कलाकार थे. उन्होंने कई बेहतरीन पेंटिंग्स बनाई थीं जिनमें से मोना लिसा और द लास्ट सपर को मास्टरपीस कहा जाने लगा. वो एक उम्दा कलाकार तो थे ही, इसके साथ-साथ उन्हें कई अलग-अलग फ़ील्ड के बारे में अच्छी खासी नॉलेज थी जैसे बॉटनी, एनाटोमी, मिलिट्री इंजीनियरिंग वगैरह. उनकी इस गहरी नॉलेज के लिए उन्हें renaissance पॉलीमैथ कहा जाता है यानी एक ऐसा आदमी जिसकी एक फील्ड में मास्टरी और expertise तो है ही लेकिन इसके साथ-साथ उसे लगभग हर फील्ड के बारे में बहुत डीप नॉलेज भी होती है.
लियोनार्डो की कई पेंटिंग को मास्टरपीस का टाइटल दिया गया जिनमें St. John the Baptist, Madonna of the Rocks, और Salvator Mundi शामिल हैं. डा विंची के काम को बहुत वाहवाही और तारीफ़ मिली लेकिन वो हमेशा विवादों में घिरकर चर्चा का कारण भी बने रहे. उनकी नोटबुक में बनाए उनके स्केच को उनकी पेंटिंग जितना ही कीमती माना जाता है.
उन्होंने घोड़ों, चेहरे, फूल यहाँ तक कि माँ के गर्भ में पल रहे बच्चे तक की इतनी सटीक और जीवंत तस्वीर बनाई है जिसे देखो तो लगता है कि मानो अभी ये तस्वीर बोल पड़ेगी. लियोनार्डो इतने जीनियस थे कि वो जिस समय में रह रहे थे उससे कहीं आगे की सोच रखते थे और उन्होंने अपने समय से आगे निकलकर कई चीज़ें इंवेंट की जैसे पैराशूट, हेलीकॉप्टर, मशीन गन और उन्होंने अपने इन उम्दा आविष्कारों के स्केच भी बनाए.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि लियोनार्डो एक नाजायज़ संतान थे? उनके पिता एक उभरते हुए वकील थे और माँ एक छोटे से गाँव में खेतों में काम करने वाली साधारण लड़की. डा विंची अपने पिता के नक्शेकदम पर नहीं चले क्योंकि जिन बच्चों का जन्म बिना शादी के होता था उन्हें एक प्रोफेशनल करियर बनाने की इजाज़त नहीं थी. इस तरह, डा विंची ने ख़ुद अपना रास्ता बनाया और दुनिया के महान कलाकार और थिन्कर्स में से एक बने.
इस बुक में आप ऐसे 6 प्रिंसिपल्स के बारे में जानेंगे जो आपको लियोनार्डो की तरह मल्टीप्ल स्किल्स डेवलप करने में मदद करेंगे. आप एक ऐसा इंसान बनना सीखेंगे जो अपनी नॉलेज को एक ही फील्ड तक सीमित नहीं रखता और हमेशा ज़्यादा जानने और सीखने की इच्छा रखता है.
लियोनार्डो italian थे इसलिए इस बुक के ऑथर माइकल ने इन प्रिंसिपल्स को उन्हीं की भाषा में एक्सप्लेन किया है. लियोनार्डो के 6 प्रिंसिप्ल हैं – Curiosita (क्युरियोसिटा) यानी जानने की इच्छा रखना, Dimostrazione (डिमोस्ट्राजिओने) यानी एक्सपीरियंस से सीखना, sensazione (सेनसाज़िओने) यानी अपने five senses का मैक्सिमम इस्तेमाल करना, Sfumato (स्फूमाटो) यानी तुरंत किसी चीज़ को जज नहीं करना, arte/scienza (आर्ट एंड सिंजा) यानी आर्ट और लॉजिक के बीच balance बनाना और Corporalita (कोर्पोरलिता) यानी physical fitness. तो आइए एक एक कर इन्हें डिटेल में समझते हैं.
Sfumato (स्फूमाटो)
Sfumato शब्द का मतलब है धुंए की तरह ऊपर जाना या धुंधला हो जाना जहां कुछ भी साफ़-साफ़ दिखाई नहीं देता. इसकी झलक हमें लियोनार्डो के यूनिक पेंटिंग स्टाइल में देखने को मिलती है. अगर आप मोना लिसा की पेंटिंग गूगल करेंगे तो आप देखेंगे कि वो पेंटिंग बड़ी ही रहस्यमयी है. मोना लिसा की मुस्कान का राज़ आज तक कोई नहीं जान पाया. उसमें इतने इमोशन छुपे हुए हैं कि आप चाह कर भी नहीं जान पाएँगे कि उसकी मुस्कान के पीछे की असली भावना क्या है. उसे इस तरह बनाया गया है कि आप एक ही बार में उसमें छुपे मैसेज को समझ नहीं पाएँगे. उस हलकी सी मुस्कान में अच्छाई और बुराई, सिडक्शन और मासूमियत, दया और क्रूरता सबकी झलक दिखाई देती है. आपको क्या लगता है कि लियोनार्डो इससे क्या मैसेज देना चाहते थे?
इस पेंटिंग की बड़ी ही दिलचस्प बात ये है कि अगर आप करीब से देखेंगे तो आप देख सकते हैं कि मोना लिसा के मुंह और आँखों का कोना हलकी सी परछाई में ढका हुआ है. यही बात उस मुस्कान को रहस्यमयी बनाती है. उसकी आँखों की शिकन और होटों के किनारे हमें बता सकते थे कि वो उस पेंटिंग में असल में क्या महसूस कर रही थी लेकिन लियोनार्डो का यही तो इरादा था कि उन्होंने इसे एक पहेली की तरह पेंटिंग देखने वालों पर छोड़ दिया.
यही पहला प्रिंसिप्ल है कि हमें तुरंत किसी चीज़ को जज नहीं करना चाहिए या किसी नतीजे पर नहीं पहुंचना चाहिए. एक ही चीज़ के कई अलग अलग पहलू हो सकते हैं इसलिए उसके पीछे के कारण को समझने की सोच अपनानी चाहिए तब जाकर आप उसे सही तरीके से जज कर पाएँगे. थोडा अलग एंगल से सिचुएशन को देखने की कोशिश करें. किसी नई चीज़ को देखकर उसके बारे में सवाल करना और उसका जवाब ढूँढने की इच्छा बनाए रखनी चाहिए. ये आपको सच और झूठ के बीच के फ़र्क को समझने में मदद करता है. ये आपके सोचने की पॉवर और इंटेलिजेंस को बढ़ाता है.
शायद यही वो ख़ासियत है जिसने लियोनार्डो को इतने सारे इन्वेंशन करने में मदद की थी. इस बात को याद रखें कि जीनियस कभी तुरंत किसी नतीजे पर नहीं पहुँचते, वो उसे अलग अलग एंगल से समझने की कोशिश करते हैं उसके बाद नतीजे पर पहुँचते हैं.
सालों से आर्ट एक्सपर्ट्स और साइकोलोजिस्ट ने ये सवाल किया है कि “आख़िर इस पेंटिंग की मॉडल थी कौन? क्या वो सच में कोई लड़की थी या सिर्फ़ एक इमेजिनेशन थी ?” लेकिन आज तक इसका कोई सटीक जवाब नहीं दे पाया. किसी ने कहा कि वो Lisa del Giocondo थी जो Francesco del Giocondo नाम के सिल्क के व्यापारी की पत्नी थी. किसी ने कहा कि मोना लिसा में उन सभी औरतों की झलक थी जिन्हें लियोनार्डो ने अपनी जिंदगी में देखा था जैसे उनकी माँ, रईसों की प्रेमिका या राह चलती आम औरतें.
लेकिन Bell Labs के Dr. Lillian Schwartz का एक अलग और बड़ा ही दिलचस्प नज़रिया था. उनका मानना था कि मोना लिसा लियोनार्डो की ख़ुद की तस्वीर हो सकती थी, इसे सेल्फ़ पोर्ट्रेट कहते हैं.
लेकिन कुछ लोग कहते हैं कि लियोनार्डो के पास सिर्फ़ एक सेल्फ़-पोर्ट्रेट थी जिसे उन्होंने लाल रंग के chalk से बनाया था. उस पेंटिंग में उनके लंबे लहराते बाल, घनी भौहें और उम्र के साथ आने वाली आँखों के आस पास की झुर्रियां साफ़ दिखाई दे रही थीं.
Dr. Schwartz ने मोना लिसा की पेंटिंग और उस सेल्फ़ पोर्ट्रेट को साथ साथ देखने के लिए सटीक माप के साथ कंप्यूटर मॉडलिंग का इस्तेमाल किया. गौर से देखने पर आप देखे पाएँगे कि मोना लिसा और लियोनार्डो का माथा, आँख, नाक, होंठ बिलकुल समान रूप से एक लाइन में थे. ऐसा लग रहा था मानों वो एक ही तस्वीर के दो साइड की तरह थे.
कैथोलिक चर्च Michelangelo और Bernini की तरह लियोनार्डो को ज़्यादा पसंद नहीं करते थे क्योंकि लियोनार्डो बाइबिल में दिखाए गए scene का मीनिंग अपने नज़रिए से निकालते थे.
कहते हैं कि Madonna of the Rocks और Virgin and Child with St. Anne पेंटिंग के दो अलग अलग version हैं. एक बहुत चौकाने वाला और दूसरा बहुत कोमल है. लियोनार्डो जैसे मास्टर पेंटर कोई भी चीज़ अनजाने में या इत्तेफ़ाक से नहीं करते. हर चीज़ के पीछे एक ठोस कारण होता था जो अक्सर आम लोगों की नज़रें देख नहीं पातीं थी. उनकी पेंटिंग में लोगों के चेहरों के हावभाव, बॉडी की पोजीशन, हाथ का इशारा सब बिलकुल वैसा ही होता था जैसा वो उन्हें दिखाना चाहते हैं और आप माने या ना माने उनकी छोटी से छोटी बात में भी कोई ना कोई मैसेज ज़रूर छुपा हुआ होता था.
शायद हम कभी नहीं जान पाएँगे कि लियोनार्डो Last Supper या St. John the Baptist में असल में हमें क्या बताना चाहते थे. ये हमारे ऊपर है कि हम उनकी कला की सुंदरता और रहस्य को किस तरह समझते हैं.
Curiosita (क्युरियोसिता)
बचपन से ही लियोनार्डो को अपने आस पास की दुनिया के बारे में जानने की इच्छा रहती थी. अक्सर वो कागज़ और पेंसिल लेकर जंगलों में घूमने चले जाते थे. जो भी चीज़ उनका ध्यान खींच लेती थी वो उसका स्केच बनाने बैठ जाते. वो घंटों पेड़, फूल, पत्तियाँ को निहारते रहते. वो अपने हर थॉट को एक नोटबुक में लिखते थे. उनके मन में कई सवाल आते थे जैसे “इस दुनिया में कितने तरह के जानवर, फूल और नदियाँ हैं?” ये पक्षी कैसे उड़ पाते हैं? जिस जगह पत्थर पानी से टकराता है वहाँ गोल चक्कर जैसा क्या बनने लगता है? ना जाने क्यों ये अजीबोगरीब सवाल हर वक़्त मेरे दिमाग पर कब्ज़ा किए रहते हैं.”
जब लियोनार्डो किसी फूल की तस्वीर बनाते तो उसे तीन अलग अलग एंगल से बनाते, वो उनकी सुंदरता और बनावट देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते. पक्षियों की उड़ान भी उन्हें बड़ी दिलचस्प लगती थी. एक पक्षी कैसे हवा में अपने पंख फडफडाता है वो उसे भी तस्वीर में कैद कर लेते थे.
लियोनार्डो के बारे में एक और ख़ास बात थी जो उन्हें दूसरे कलाकारों से अलग बनाती थी. उन्हें औरतों की सुंदरता को तस्वीर में उतारने में ज़्यादा रूचि नहीं थी. वो हर किसी के लिए काम करते थे चाहे वो चर्च हो या कोई और. उनकी कला नेचर, सुंदरता और सच्चाई के लिए समर्पित थी.
उन्होंने ये टिप्स अपनी पेंटिंग पर लिखे थे. ये इंसान की फ़ितरत होती है कि वो दूसरों के काम में गलतियां बड़ी आसानी से ढूंढ लेता है. इसलिए ये देखने के लिए कि हमें अपने काम में क्या सुधार करने की ज़रुरत है, आपको एक दर्पण के ज़रिए उसके reflection को स्टडी करना चाहिए. इस तरह आप उसे एक अलग नज़रिए से जज कर पाएँगे.
लियोनार्डो का मानना था कि काम करते वक़्त बीच में छोटे छोटे ब्रेक भी लेने चाहिए. एक कलाकार को थोड़ी देर के लिए बाहर जाकर आराम भी करना चाहिए. अपने काम से कुछ देर के लिए दूर रहना हमें उसे एक फ्रेश नज़रिए से देखने में मदद करता है और हमारे लिए बचा हुआ काम करना आसान बना देता है.
उन्होंने एक और technique के बारे में बताया था जो था पेंटिंग को दूर से देखना. जब आप पेंटिंग को दूर से देखते हैं तो आप उसके रंगों को, उसके आकार को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं. लियोनार्डो अक्सर फ्लोरेंस की सड़कों पर नेचर की ख़ूबसूरती और लोगों के चेहरों के हावभाव को गौर से देखने निकल जाया करते थे. कभी-कभी वो उन लोगों को देखते जो पिंजरे में पक्षियों को कैद कर उन्हें बेचते थे.
लियोनार्डो उन्हें ख़रीदकर, पिंजरे का दरवाज़ा खोल उन पक्षियों को आज़ाद कर देते थे. वो बड़े प्यार और अचंभे से उन्हें नीले आसमान में खुलकर उड़ते हुए देखते रहते. पक्षियों को हलकी हवा में धूप की किरणों के बीच पंख फडफडाते हुए उड़ते देखना उन्हें बहुत ख़ुशी देता था.
इस प्रिंसिप्ल हमें ये सिखाती है कि हमेशा जानने की इच्छा को जगाए रखें. जानने की इच्छा हमारे मन में सवाल पैदा करती जिसका जवान ढूँढने की हमें कोशिश करनी चाहिए. ये हमारे ब्रेन को शार्प बनाता है, हम डिटेल को नोटिस करना सीखते हैं. कहते हैं नेचर हमें जितना सिखा सकती है उतना कोई नहीं सिखा सकता इसलिए लियोनार्डो नेचर में मौजूद हर चीज़ को बड़े ध्यान से देखा करते थे.
Dimostrazione (डिमोस्ट्राजिओने)
बचपन में लियोनार्डो को कभी ठीक से पढ़ने लिखने का मौका नहीं मिला. जब वो थोड़े बड़े हुए तो मास्टर पेंटर और मूर्तिकार Andrea del Verrochio के शिष्य बन गए. उनके स्टूडियो में लियोनार्डो ने रंगों को मिक्स करना और कैनवास तैयार करने का तरीका सीखा. Verrochio एक्सपीरियंस से सीखने में विश्वास करते थे. उन्होंने लियोनार्डो को ब्रोंज़ कास्टिंग, मूर्ती बनाने की कला वगैरह का काम सिखाया. उन्होंने लियोनार्डो को पेड़ पौधे, इंसान और जानवरों की बॉडी के स्ट्रक्चर को स्टडी करना भी सिखाया. इस एजुकेशन ने उनकी बहुत मदद की. लियोनार्डो की पहली पेंटिंग Verrochio के Baptism of Christ के ऊपर थी. ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने परी की तस्वीर को नीचे लेफ्ट कार्नर में बनाया था.
आर्ट एक्सपर्ट्स ने एक बार x-ray के ज़रिए उसे गौर से देखने की कोशिश की. उन्होंने देखा कि x-ray में Verrochio के ब्रश से बनने वाली स्ट्रोक साफ़-साफ़ दिखाई दे रही थी. लेकिन लियोनार्डो के ब्रश स्ट्रोक इतने महीन और मक्खन की तरह चिकने थे कि x-ray उसके आर पार गुज़र गई. उन्होंने बहुत बेहतरीन कारीगरी से उसमें रंग भरा था. इसलिए x-ray उसके आर पार हो गई. ऐसा लग रहा था मानों उन्होंने तस्वीर नहीं बनाई थी बल्कि सच में एक परी की रचना कर दी थी.
ट्रेनिंग के बाद लियोनार्डो एक एक्सपर्ट बन गए थे और उन्होंने एक गिल्ड को ज्वाइन किया. ये डॉक्टरों और कलाकारों का एक ग्रुप था जिसका नाम “सेंट ल्यूक” था. बॉडी के स्ट्रक्चर को समझने के लिए लियोनार्डो ने लगभग तीस इंसानों की लाश और अनगिनत जानवरों के शरीर को काटा भी था. उन्होंने उनके शरीर के हिस्सों की तसवीरें अपनी नोटबुक में बनाई थीं. यही वजह है कि उनकी पेंटिंग में फिजिकल बॉडी का स्केच इतना परफेक्ट होता था.
लियोनार्डो प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस से चीज़ों को टेस्ट कर सीखने में विश्वास करते थे. उनका मानना था कि कही सुनी बातों पर यकीन नहीं करना चाहिए बल्कि उसे ख़ुद टेस्ट कर अपनी इंडिपेंडेंट थिंकिंग को बढ़ाना चाहिए. उनका कहना था कि नेचर से बेहतर टीचर कोई नहीं हो सकता इसलिए अपने आस पास की चीज़ों को गौर से देखें, वो आपको बहुत कुछ सिखाएगी.
लियोनार्डो के बारे में एक और दिलचस्प बात है कि उन्होंने 42 की उम्र में ख़ुद लैटिन भाषा सीखी ताकि वो क्लासिक्स में लिखी बातों को बेहतर समझ सकें. उन्होंने मेडिसिन, मैथ्स, युद्धकला की कई किताबें पढ़ी थीं. एक जगह उन्होंने लिखा था “एक्सपीरियंस कभी गलत नहीं होते. आप फेल तभी होते हैं जब आप अपने एक्सपेरिमेंट से तुरंत रिजल्ट मिलने की उम्मीद करते हैं.” इसके साथ ही उन्होंने ये भी लिखा कि “रुकावट मुझे झुका नहीं सकती. हर बाधा पक्के इरादे और अटलता से चकनाचूर हो जाती है.”
लियोनार्डो को एक्सपेरिमेंट करना बहुत पसंद था. उनमें से कई बुरी तरह फेल भी हुए थे लेकिन फेलियर ने उन्हें कभी दोबारा कोशिश करने से नहीं रोका. इसी ख़ासियत की वजह से वो अनगिनत इन्वेंशन करने में क़ामयाब हुए.
Sensazione (सेनसाज़िओने)
लियोनार्डो हमारे पांच सेंस organs को बहुत अहमियत देते थे. उनका मानना था कि हमें इसका ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करना चाहिए. इस प्रिंसिपल का मतलब है हर चीज़ को गौर से डिटेल में देखना. ये आपके ब्रेन पॉवर और लर्निंग स्किल को बढ़ाते हैं. ये हमारा फोकस बढ़ाकर हमें जीनियस बनाते हैं. सेंसेस का ज़्यादा इस्तेमाल करना मतलब हर आवाज़ को गौर से सुनना, अगर खाना खा रहे हैं तो उसका पूरा ज़ायका लेना, आँखों के माध्यम से हर चीज़ की डिटेल को देखना.
लियोनार्डो हमेशा अपने सेंसेस का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करते थे. वो बड़े गौर से अपने आस पास के परिवेश, पहाड़ों, झरनों, जानवरों और लोगों के हावभाव को देखते और उससे सीखते. जितना हो सकता था वो उतने अच्छे कपड़े पहनते थे. उन्होंने अपने स्टूडियो को फूलों और परफ्यूम की खुशबू से भर दिया था. वो कम क्वांटिटी में healthy खाना जिसे ख़ूबसूरती से प्लेट में सजाया गया हो उसे खाना पसंद करते थे.
क्या आप जानते हैं कि लियोनार्डो एक म्यूजिशियन भी थे. वो वीणा, बांसुरी के साथ साथ कई इंस्ट्रूमेंट बजा सकते थे. कहते हैं उनकी आवाज़ भी बहुत सुरीली थी. जब मिलान के Ludovico Sforza ने उन्हें काम पर रखा तब लियोनार्डो ने घोड़े के सिर के आकार की एक चांदी की वीणा बनाई और उसे Ludovico Sforza को तोहफ़े में दिया.
लियोनार्डो कहते थे कि बड़े दुःख की बात है कि ज़्यादातर लोग अपने सेंसेस का सही इस्तेमाल नहीं करते, वो बस पेट भरने के लिए खाते थे लेकिन उसका स्वाद नहीं लेते थे, वो बोलते तो थे लेकिन सोचे समझे बिना, सुनते तो थे लेकिन कुछ महसूस नहीं करते थे.
चलिए आप इमानदारी से बताइए, आखरी बार कब आपने आसमान को देखकर चाँद और तारों की सुंदरता की तारीफ़ की थी? आखरी बार कब था जब आपने बिना जल्दबाज़ी किए अपने खाने का ज़ायका लेकर खाया था? जो चीज़ हमारे पास होती है हम उसकी कदर नहीं करते. नेचर ने आपको सेंस organs दिए हैं उनके प्रति ज़्यादा सेंसिटिव होने की कोशिश करें. आज हम इतने बिजी हो गए हैं कि बस मौजूद हैं, जी नहीं रहे हैं. अगर आप भी जीने के सही मायने को महसूस करना चाहते हैं तो लियोनार्डो की तरह अपने सेंसेस को ज़्यादा यूज़ करें और जिंदगी के हर पल का भरपूर आनंद लें.
Arte/Scienza (आर्ट एंड सिंज़ा)
लियोनार्डो लेफ़्ट हैंडेड थे तो ये कहा जा सकता है कि उनका राईट ब्रेन ज़्यादा एक्टिव था. लेकिन जैसा कि आप जानते हैं वो सिर्फ़ एक आर्टिस्ट नहीं थे बल्कि साइंटिस्ट भी थे. उनकी एक बड़ी ही अनोखी आदत भी थी, वो मिरर राइटिंग की प्रैक्टिस करते थे. उनकी सारी नोटबुक उसी तरह लिखी हुई थी. कुछ साइकोलोजिस्ट ने इसके पीछे के गहरे मीनिंग को समझने की कोशिश की कि लियोनार्डो रिवर्स में क्यों लिखते थे. लेकिन फ़िर उन्होंने सोचा कि ये उनके लिए ज़्यादा कम्फ़र्टेबल होता होगा क्योंकि वो लेफ्ट हैंड से लिखते थे.
1994 में बिल गेट्स ने लियोनार्डो के नोटबुक के 18 पेज 30 मिलियन डॉलर में खरीदे थे. साइंस ने इस बात को प्रूव किया है कि ब्रेन का लेफ्ट हिस्सा लॉजिक और रीजनिंग के साथ काम करता है और राईट हिस्सा इमेजिनेशन और क्रिएटिविटी के साथ. लेकिन लियोनार्डो का मानना था कि आर्ट और साइंस दोनों साथ साथ चलते हैं, इन दोनों को एक दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता. उन्होंने ह्यूमन बॉडी, बहते पानी, फूल पौधे को बड़े गौर से देखा और उसका इस्तेमाल अपनी कला को एक्सप्रेस करने के लिए किया. वो अपनी पेंटिंग और मूर्तियों का आउटलाइन बनाने के लिए मैथ्स के सटीक मेज़रमेंट को यूज़ करते थे. इस तरह, लियोनार्डो पूरे ब्रेन को थिंकिंग के लिए इस्तेमाल करने पर ज़ोर देते थे.
उनका कहना था कि जो लोग बिना साइंस को अप्लाई किए अपनी कला को आकार देते हैं वो उन sailors की तरह होते हैं जो बिना compass लिए समुद्र की यात्रा पर निकल जाते हैं, ऐसे लोग कभी अपनी मंज़िल तक नहीं पहुँच सकते. वो इस बात में विश्वास करते थे कि एक आर्टिस्ट को इंसान की ख़ूबसूरती को कैनवस पर उतारने के लिए उसके ह्यूमन स्ट्रक्चर को स्टडी ज़रूर करना चाहिए. बिना इस नॉलेज के पेंटर सिर्फ़ निर्जीव लोगों की तस्वीर बना पाएगा जिसमें कोई सुंदरता और कला नहीं होगी.
लियोनार्डो ने अपने स्टूडेंट्स को डिटेल, लॉजिक और मैथ्स पर ध्यान देने के लिए encourage किया और कहा कि इसके साथ साथ वो खुलकर अपनी इमेजिनेशन पॉवर का भी इस्तेमाल करें.
छोटी छोटी चीज़ों को देखने के बजाय पूरी पिक्चर देखने की उनकी एबिलिटी ने उन्हें बिना किसी मॉडर्न टेक्नोलॉजी की मदद के बिलकुल सटीक मैप तैयार करने में मदद की. वो कहते थे “Study the science of art and study the art of science” यानी “आर्ट के पीछे के साइंस को समझो और साइंस के पीछे के आर्ट को देखो.” लियोनार्डो शायद इकलौते ऐसे महान कलाकार हैं जिन्होंने हमें कई यूनिक इन्वेंशन, स्केच और नोट्स दिए हैं जिन्हें आज भी उतना ही कीमती माना जाता है जितना उनके समय में माना जाता था.
Corporalita (कोर्पोरालिता)
लियोनार्डो के नोटबुक में पजल और जोक्स के अलावा आपको अच्छी हेल्थ और फिजिकल फ़िटनेस के बारे में कई दिलचस्प टिप्स भी मिलेंगे. उनका मानना था कि अच्छी हेल्थ आपको एक फ़िट दिमाग देती है.
Giorgio Vasari जिन्होंने कई फेमस आर्टिस्ट के बारे में लिखा था वो लियोनार्डो के बारे में कहते हैं कि वो हॉर्स राइडिंग में बहुत कुशल थे. एक्सरसाइज के तौर पर वो स्विमिंग और तलवारबाज़ी भी करते थे. इन चीज़ों ने लियोनार्डो की बॉडी को बहुत स्ट्रोंग, attractive और फिट बना दिया था.
लियोनार्डो ने अपनी नोटबुक में कुछ हेल्थ टिप्स भी दिए हैं. वो कहते हैं कि गुस्से और उदासी से दूर रहो. अपने मन को ख़ुश रखो. हर रोज़ एक्सरसाइज करो. आप क्या खा रहे हैं उस पर ध्यान दो. खाने को धीरे-धीरे चबाकर खाओ. भूख लगने पर ही खाना खाओ और हल्का खाना खाओ. रात को अच्छी नीद लो और अपना digestive सिस्टम ठीक रखो.
लियोनार्डो वेजीटेरियन थे और तो और वो खाना बनाने में भी माहिर थे. उनके हिसाब से healthy खाना और एक्सरसाइज के बीच एक बैलेंस बनाना आपको अच्छी हेल्थ देता है.
कन्क्लूज़न
फ़्रांस के राजा Francois I ने लियोनार्डो को पेंटर, आर्किटेक्ट और इंजिनियर के रूप में काम पर रखा था लेकिन असल में वो राजा के साथ ज्ञान और फिलोसोफी की बातों पर गहराई से चर्चा किया करते थे. राजा ने उन्हें रहने के लिए एक शानदार बँगला दिया था और उन्हें हर महीने सैलरी भी दी जाती थी. वहाँ रहते हुए 67 की उम्र में लियोनार्डो ने दुनिया को अलविदा कहा.
अपने अंतिम दिनों में लियोनार्डो ने अपनी बीमारी के symptoms के बारे में भी लिखा. उन्होंने अपना सारा सामान अपने वफ़ादार स्टूडेंट Francesco Melzi के लिए छोड़ दिया था. कहते हैं कि राजा के साथ उनकी गहरी दोस्ती हो गई थी और उन्होंने अपनी आखरी सांसें राजा की बाहों में ली थीं.
कुछ लोगों का कहना है कि लियोनार्डो होमोसेक्सुअल थे तो कई लोग कहते हैं कि वो फ्री थिंकर थे जिनकी सोच धर्म से कुछ अलग थी, और किसी बात का तो पता नहीं लेकिन एक सच है जिसे कोई नहीं बदल सकता कि वो एक जीनियस थे. वो एक महान कलाकार थे जिन्होंने अपना पूरा जीवन कला, साइंस, नेचर और उसकी सुंदरता के लिए समर्पित कर दिया था.
तो इस बुक में आपने छ प्रिंसिपल्स के बारे में सीखा जो आपको लियोनार्डो की तरह अपनी बॉडी और माइंड के फुल पोटेंशियल को हासिल करने में मदद करेंगे.
Curiosita (क्युरियोसिटा) यानी हमेशा जानने और सीखने की इच्छा बनाए रखना. जितना ज़्यादा आप सवाल पूछेंगे उतना ही ज़्यादा आप उस फील्ड के बारे में जानेंगे जो आपको उसका मास्टर बना देगा. एक जर्नल या नोटबुक मेन्टेन करें जिसमें आप अपने आईडिया, थॉट्स और सीखी हुई चीज़ें लिख सकें. ये आपको अपने गोल्स अचीव करने में मदद करता है.
Dimostrazione (डिमोस्ट्राजिओने) यानी किसी भी बात या थ्योरी को यूहीं नहीं मान लेना चाहिए बल्कि उसे टेस्ट करना चाहिए, उसे एक्शन लेकर ख़ुद एक्सपीरियंस करें. एक्सपीरियंस से ज़्यादा आपको कुछ नहीं सिखा सकता. इसलिए गलती करने से डरो मत और हर फेलियर को सीखने की opportunity के रूप में देखो. प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस हमें ज़्यादा इफेक्टिव तरीके से सिखाती है.
sensazione (सेनसाज़िओने) यानी हमारे पांच सेंसेस. अपने सेंस organs को अच्छे से ज़्यादा से ज़्यादा यूज़ करें. चीज़ों को गौर से देखें, उसके डिटेल को समझें. आप जो चीज़ देख रहे हैं, सुन रहे हैं, टच कर रहे हैं उसे फील करें, उस पल में पूरी तरह मौजूद रहे. कुछ खा रहे हैं तो उसके हर ingredient को taste करें, अगर कुछ छू रहे हैं तो उसे फील करें. ये आपके फोकस को बढ़ा देता है.
Sfumato (स्फूमाटो) यानी तुरंत किसी बात को जज ना करें और ना ही किसी नतीजे पर पहुंचें. एक ही चीज़ के कई अलग अलग पहलू हो सकते हैं इसलिए उसे समझने की कोशिश करें. उसके पीछे कारण को समझने की सोच अपनाएं.
arte/scienza (आर्ट एंड सिंजा) यानी आर्ट एंड साइंस के बीच बैलेंस डेवलप करना, लॉजिक और इमेजिनेशन के बीच बैलेंस बनाना. अपने माइंड की कैपेसिटी को सीमित ना करें. लॉजिक और क्रिएटिविटी के बीच बैलेंस बनाने की कोशिश करें. दोनों को इम्पोर्टेंस देना सीखें. हमसे से ज़्यादातर लोग या तो लेफ्ट ब्रेन को यूज़ या राईट ब्रेन को और सच पूछिए तो हम अपने ब्रेन का बहुत कम हिस्सा ही असल में यूज़ करते हैं. लेकिन अगर आप एक जीनियस बनना चाहते हैं तो आपको दोनों हिस्सों को यूज़ करना शुरू करना होगा.
Corporalita (कोर्पोरालिता) यानी बॉडी और माइंड की देखभाल. बॉडी और माइंड एक दूसरे से कनेक्टेड होते हैं इसलिए healthy खाना खाएं, पूरी नींद लें और एक्सरसाइज करें क्योंकि हम जितने ज़्यादा फिजिकली फिट और स्ट्रोंग होंगे उतना ही ज़्यादा हम मेंटली स्ट्रोंग बन पाएँगे जो हमारे फोकस और क्रिएटिविटी को बढ़ाने में मदद करेगा.
किसी एक इंसान के लिए आर्ट, इंजीनियरिंग, बॉटनी, मैथमेटिक्स यहाँ तक कि हर फील्ड की इतनी नॉलेज होना कैसे पॉसिबल हो सकता है? ये आप भी अचीव कर सकते हैं. अगर आप अपने एक एक मिनट को प्रोडक्टिव तरीके से यूज़ कर ज़्यादा सीखने की इच्छा को जगाए रखते हैं और एक्सीलेंस का aim रखते हैं तो आप भी एक जीनियस बन सकते हैं. अगर आपने इन 6 प्रिंसिपल्स को बखूबी समझकर अप्लाई करना सीख लिया तो आपकी प्रोडक्टिविटी और फोकस ज़रूर बढ़ेगी और कौन जानता है कि आने वाले समय में आप कोई ऐसी चीज़ इन्वेंट कर एक रेवोल्यूशन ले आएं जिसके लिए आपको जीनियस कहा जाएगा और आपके बारे में किताबों में लिखा जाएगा.
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